Thursday, 3 April 2025

ये रात भीगी-भीगी, ये मस्त फिज़ायें - लता मंगेशकर - मन्ना डे

ये रात भीगी-भीगी, ये मस्त फिज़ायें -  लता मंगेशकर - मन्ना डे


ये रात भीगी-भीगी, ये मस्त फिज़ायें

उठा धीरे-धीरे, वो चाँद प्यारा प्यारा

क्यों आग सी लगा के, गुमसुम हैं चांदनी

सोने भी नहीं देता, मौसम का ये इशारा

ये रात भीगी-भीगी...


इठलाती हवा, नीलम सा गगन

कलियों पे ये बेहोशी की नमी

ऐसे में भी क्यों बेचैन है दिल

जीवन में ना जाने क्या है कमी

ये रात भीगी-भीगी...


जो दिन के उजाले में ना मिला

दिल ढूँढें ऐसे सपने को

इस रात की जगमग में डूबी

मैं ढूँढ रही हूँ अपने को

ये रात भीगी-भीगी...


ऐसे में कहीं क्या कोई नहीं

भूले से जो हमको याद करे

एक हलकी सी मुसकान से जो

सपनों का जहां आबाद करे

ये रात भीगी-भीगी...

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चित्रपट : चोरी चोरी
साल : १९५६
संगीत : शंकर - जयकिशन
गीतकार : हसरत जयपुरी
गायक / गायिका : लता मंगेशकर - मन्ना डे


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