नसीब इंसान का चाहत से ही संवारता है - मनहर उदास - कंचन - आनंद कुमार
Anand
ओ हो, हो हो
नसीब इंसान का, नसीब इंसान का
नसीब इंसान का चाहत से ही संवारता है
क्या बुरा इस में किसी पर जो कोई मरता है
Manhar
हम तुम्हे चाहते हैं ऐसे
हम तुम्हे चाहते हैं ऐसे
मरने वाला कोई
मरने वाला कोई ज़िन्दगी चाहता हो जैसे
हम तुम्हे चाहते हैं ऐसे
रूठ जाओ अगर तुम तो क्या हो
रूठ जाओ अगर तुम तो क्या हो
पल में ऐसे लगे
पल में ऐसे लगे, जिस्म से जान जैसे जुदा हो
हम तुम्हे चाहते हैं ऐसे
मरने वाला कोई
मरने वाला कोई ज़िन्दगी चाहता हो जैसे
हम तुम्हे चाहते हैं ऐसे
Kanchan
रा रा, रु रा रा
ज़रा पूछो तो मेरा इरादा
ज़रा पूछो तो मेरा इरादा
मुझे किस्से है प्यार, मेरा दिल का है कौन शेह्जादा
ज़रा पूछो तो मेरा इरादा
मेरे ख़्वाबों में जो सज रहा है
मेरे ख़्वाबों में जो सज रहा है
वो खुदा तो नहीं, पर ज़माने में सब से जुदा है
मेरे ख़्वाबों में जो सज रहा है
Manhar
ज़िन्दगी बिन तुम्हारे अधूरी
ज़िन्दगी बिन तुम्हारे अधूरी
तुमको पालूँ अगर
तुमको पालूँ अगर, हर कमी मेरी हो जाए पूरी
ज़िन्दगी बिन तुम्हारे अधूरी
ले चलेंगे तुम्हे हम वहां पर
ले चलेंगे तुम्हे हम वहां पर
तन्हाई सनम
तन्हाई सनम शेहनाई बन जाए जहाँ पर
हम तुम्हे चाहते हैं ऐसे
मरने वाला कोई
मरने वाला कोई ज़िन्दगी चाहता हो जैसे
हम तुम्हे चाहते हैं ऐसे
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