Wednesday, 2 April 2025

ओ मेरी महबूबा तुझे जाना है तो जा, तेरी मर्ज़ी मेरा क्या - मोहम्मद रफ़ी

 ओ मेरी महबूबा तुझे जाना है तो जा, तेरी मर्ज़ी मेरा क्या - मोहम्मद रफ़ी


ओ मेरी महबूबा, महबूबा, महबूबा

तुझे जाना है तो जा, तेरी मर्ज़ी मेरा क्या

पर देख तू जो रूठ कर चली जाएगी

तेरे साथ ही, मेरे मरने की, ख़बर जाएगी

ओ मेरी महबूबा...


तेरी चाहत मेरा चैन चुराएगी

लेकिन तुझको भी तो नींद ना आएगी

मैं तो मर जाऊँगा लेकर नाम तेरा

नाम मगर कर जाऊँगा बदनाम तेरा

तौबा-तौबा फिर क्या होगा

के याद मेरी दिल तेरा तड़पाएगी

तेरे जाते ही, तेरे आने की, ख़बर आएगी

ओ मेरी महबूबा...


जो भी हो मेरी इस प्रेम-कहानी का

पर क्या होगा तेरी मस्त जवानी का

आशिक़ हूँ मैं तेरे दिल में रहता हूँ

अपनी नहीं मैं तेरे दिल की कहता हूँ

तौबा-तौबा फिर क्या होगा

के बाद में तू इक रोज़ पछताएगी

ये रुत प्यार की, जुदाई में ही, गुज़र जाएगी

ओ मेरी मेहबूबा...


दीवाना मस्ताना मौसम आया है

ऐसे में तूने दिल को धड़काया है

माना अपनी जगह पे तू भी क़ातिल है

पर यारों से तेरा बचना मुश्किल है

तौबा-तौबा फिर क्या होगा

के प्यार में नज़र जब टकराएगी

तड़पती हुई, मेरी जान तू, नज़र आएगी

ओ मेरी महबूबा...


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चित्रपट : धरम वीर
साल : १९७७
संगीत : लक्ष्मीकांत - प्यारेलाल
गीतकार : आनंद बक्षी
गायक / गायिका : मोहम्मद रफ़ी

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