Wednesday, 2 April 2025

आदमी मुसाफिर है, आता है, जाता है - लता मंगेशकर - मोहम्मद रफ़ी

आदमी मुसाफिर है, आता है, जाता है - लता मंगेशकर - मोहम्मद रफ़ी


आदमी मुसाफिर है,

आता है, जाता है

आते जाते रस्ते में,

यादें छोड जाता है

आदमी मुसाफिर है,

आता है, जाता है

आते जाते रस्ते में,

यादें छोड जाता है

आदमी मुसाफिर है

आदमी मुसाफिर है


झोंका हवा का, पानी का रेला

झोंका हवा का, पानी का रेला

मेले में रह जाये जो अकेला

मेले में रह जाये जो अकेला

फिर वो अकेला ही रह जाता है

आदमी मुसाफिर है

आता है, जाता है

आते जाते रस्ते में,

यादें छोड जाता है


कब छोड़ता है, ये रोग जी को

कब छोड़ता है, ये रोग जी को

दिल भूल जाता है जब किसी को

दिल भूल जाता है जब किसी को

वो भूलकर भी याद आता है


आदमी मुसाफिर है आता है, जाता है

आते जाते रस्ते में,यादें छोड जाता है

आदमी मुसाफिर है

आदमी मुसाफिर है


क्या साथ लाये, क्या तोड़ आये

क्या साथ लाये, क्या तोड़ आये

रस्ते में हम क्या-क्या छोड़ आये

रस्ते में हम क्या-क्या छोड़ आये

मंजिल पे जा के याद आता है

आदमी मुसाफिर है,आता है, जाता है

आते जाते रस्ते में, यादें छोड जाता है


जब डोलती है, जीवन की नैय्या


जब डोलती है, जीवन की नैय्या


कोई तो बन जाता है खिवैय्या


कोई तो बन जाता है खिवैय्या

कोई किनारे पे ही डूब जाता है


आदमी मुसाफिर है

आता है, जाता है


आते जाते रस्ते में,

यादें छोड जाता है


आदमी मुसाफिर है

आता है, जाता है


आते जाते रस्ते में,

यादें छोड जाता है

यादें छोड जाता है

यादें छोड जाता है

----------

चित्रपट : अपनापन
साल : १९७७
संगीत : लक्ष्मीकांत - प्यारेलाल
गीतकार : आनंद बक्षी
गायक / गायिका : लता मंगेशकर - मोहम्मद रफ़ी

No comments:

Post a Comment

दिल लेना खेल है दिलदार का - राहुल देव बर्मन

दिल लेना खेल है दिलदार का  - राहुल देव बर्मन दिल लेना खेल है दिलदार का  भूले से नाम ना लो प्यार का  प्यार भी रूठा यार भी रूठा  देखो मुझको दि...