Thursday, 3 April 2025

लागा गोरी गुजरिया से नेहा हमार - मोहम्मद रफ़ी

लागा गोरी गुजरिया से नेहा हमार - मोहम्मद रफ़ी


लागा गोरी गुजरिया से नेहा हमार

होइ गवा सारा चौपट मोरा रोजगार


नैन लड़ जई हे तो मनवा मा कसक होइबे करी

प्रेम का चुटी हे पटाखा तो धमक होइबे करी

नैन लड़ जई हे...


रूप को मनमा बसईबा तो बुरा का होई हे

तोहू से प्रीत लगईबा तो बुरा का होई हे

प्रेम की नगरी म कुछ हमरा भी हक़ होइबे करी

नैन लड़ जई हे...


होई गवा मनमा मोरे तिरछी नजर का हल्ला

गोरी को देखे बिना निंदिया ना आवै हमका

फाँस लगी है तो करेजवा म खटक होइबे करी

नैन लड़ जई हे...


आँख मिल जई है सजनिया से तो नाचन लगीहे

प्यार की मीठी गजल मनवा भी गावन लगीहे

झाँझ बजी है तो कमरिया म लचक होइबे करी

नैन लड़ जई हे...


नैना जब लड़ी है तो भैय्या मनमा कसक होइबे करी

मन ले गयी रे धोबनिया रामा कैसा जादू डार के

कैसा जादू डार के रे, कैसा टोना मार के

मन ले गयी रे...

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चित्रपट : गंगा जमुना
साल : १९६१
संगीत : नौशाद अली
गीत के बोल : शकील बदायुनी
गायक / गायिका : मोहम्मद रफ़ी

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