Wednesday, 2 April 2025

ये शाम मस्तानी मदहोश किये जाए - किशोर कुमार

ये शाम मस्तानी मदहोश किये जाए - किशोर कुमार


हे हे हूँ हूँ..

ये शाम मस्तानी

मदहोश किये जाए

मुझे डोर कोई खींचे

तेरी और लिए जाए


ये शाम मस्तानी

मदहोश किये जाए

मुझे डोर कोई खींचे

तेरी और लिए जाए


उ उ उ..


दूर रहती है तू

मेरे पास आती नहीं

होठों पे तेरे

कभी प्यास आती नहीं

ऐसा लगे जैसे के तू

हँस के ज़हर कोई पिए जाए


शाम मस्तानी

मदहोश किये जाए

मुझे डोर कोई खींचे

तेरी और लिए जाए


बात जब मैं करू

मुझे रोक देती है क्यों

तेरी मीठी नज़र

मुझे टोक देती है क्यों

तेरी हया, तेरी शर्म

तेरी कसम मेरे होंठ सिये जाए


शाम मस्तानी

मदहोश किये जाए

मुझे डोर कोई खींचे

तेरी और लिए जाए


एक रूठी हुई

तकदीर जैसे कोई खामोश ऐसे है तू

तस्वीर जैसे कोई

तेरी नज़र बनके ज़ुबां

लेकिन तेरे पैगाम दिए जाए


शाम मस्तानी

मदहोश किये जाए

मुझे डोर कोई खींचे

तेरी और लिए जाए


ये शाम मस्तानी

मदहोश किये जाए

मुझे डोर कोई खींचे

तेरी और लिए जाए

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चित्रपट : कटी पतंग
साल : १९७०
संगीत : राहुलदेव बर्मन
गीतकार : आनंद बक्षी
गायक / गायिका : किशोर कुमार

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