Thursday, 3 April 2025

तेरी प्यारी प्यारी सूरत को किसी की नज़र ना लगे - मोहम्मद रफ़ी

तेरी प्यारी प्यारी सूरत को किसी की नज़र ना लगे -  मोहम्मद रफ़ी


तेरी प्यारी प्यारी सूरत को किसी की नज़र ना लगे

चश्मे बद्दूर

मुखड़े को छुपा लो आँचल में कहीं मेरी नज़र ना लगे

चश्मे बद्दूर...


यूँ ना अकेले फिरा करो सबकी नज़र से डरा करो

फूल से ज्यादा नाज़ुक हो तुम चाल संभलकर चला करो

जुल्फों को गिरा लो गालों पर मौसम की नज़र ना लगे

चश्मे बद्दूर...


एक झलक जो पाता है राही वहीं रुक जाता है

देख के तेरा रूप सलोना चाँद भी सर को झुकाता है

देखा ना करो तुम आइना कहीं ख़ुद की नज़र ना लगे

चश्मे बद्दूर...

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चित्रपट : ससुराल
साल : १९६१
संगीत : शंकर जयकिशन
गीत के बोल : हसरत जयपुरी
गायक / गायिका : मोहम्मद रफ़ी

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