अच्छा तो ये बात है तुम भी सुन लो - मोहम्मद रफ़ी - लता मंगेशकर
अच्छा तो ये बात है
तुम भी सुन लो
जो जो सवाल मैं पूछूँ उनका सच-सच जवाब देना
डन? डन!
अच्छा, तो बाग़ों में बहार है?
क्या?
मैंने पूछा, बाग़ों में बहार है? हाँ है
कलियों पे निखार है? हाँ है
तो, तो तुमको मुझसे प्यार है
ना ना ना…
छोड़ो हटो, जाओ पकड़ो न बैंय्या
आऊँ न मैं तेरे बातों में सैंय्या
तुमने कहा है देखो, देखो मुझे सैंय्या
बोलो तुमको इक़रार है? है!
फिर भी इनकार है? हाँ है
तुमको मुझसे प्यार है
ना ना ना…
बाग़ों में बहार है…
तुमने कहा था मैं सौ दुःख सहूँगी
चुपके पिया तेरे मन में रहूँगी
वो सब कहूँगी लेकिन वो न कहूँगी
तुमको जिसका इन्तज़ार है? है
फिर भी तक़रार है? है
तुमको मुझसे प्यार है
ना ना ना…
बाग़ों में बहार है
अच्छा चलो, छेड़ो आगे कहानी
होती है क्या बोलो प्यार की निशानी
बेचैन रहती है प्रेम दीवानी
बोलो क्या दिल बेक़रार है? है
मुझपे ऐतबार है? है
जीना दुशवार है? है, है
आज सोमवार है?
अरे बाबा, है!
तुमको मुझसे प्यार है
है.. ना ना ना…
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