लेने से इंकार नहीं और देने को तैयार नहीं - मुहम्मद रफ़ी
लेने से इंकार नहीं और
देने को तैयार नहीं
लेने से इंकार नहीं और
देने को तैयार नहीं
इस दुनिया में कौन है ऐसा
जो पैसे का यार नहीं
जो पैसे का यार नहीं
लेने से इंकार नहीं और
देने को तैयार नहीं
इस दुनिया में कौन है ऐसा
जो पैसे का यार नहीं
जो पैसे का यार नहीं
है पैसा आगे आगे और
दुनिया पीछे भागे
और पैसा बड़ा छलावा
है सारे जग का बवा
एक जगह पर रुकने को जी
रुकने को तैयार नहीं
रुकने को तैयार नहीं
इस दुनिया में कौन है ऐसा
जो पैसे का यार नहीं
जो पैसे का यार नहीं
दौलत है बीमारी पर
लगे सबको प्यारी
दौलत है बीमारी पर
लगे सबको प्यारी
इसकी खातिर किसी से पगड़ी
किसी ने बीवी भी हरी
बीवी भी हार गया बेचारा
किसी ने बीवी भी हरी
लेकिन जीत सदा पैसे की
कभी भी इसकी हार नहीं
कभी भी इसकी हार नहीं
इस दुनिया में कौन है ऐसा
जो पैसे का यार नहीं
जो पैसे का यार नहीं
ये मील चलने वाला
यही चोर बनने वाला
मन यही है शं यही है
करे यही मुँह काला
मुह भी तो काला होता है
करे यही मुँह काला
कलयुग में तो इससे बढ़कर
कोई बड़ा अवतार नहीं
कोई बड़ा अवतार नहीं
इस दुनिया में कौन है ऐसा
जो पैसे का यार नहीं
जो पैसे का यार नहीं.
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